Friday, March 9, 2018

बड़े नाजुक से रिश्ते...


आज सचमुच मुझे अपने पुराने दिन याद आ गए। शायद ही मैं आज का दिन भूल सकूंगा, यह संभव है कि मैं आज का दिन कभी भी जीवन में ना भूलूँ। पिछले 10 सालों में जिन उलझन से गुजरा हूं उसने एक नई सीख दी है। मुझे ना कहने की आदत डालनी चाहिए हम सभी को खुश नहीं रख सकते। मेरी यह कोशिश कि हर किसी को खुश रखने का यह असंभव जान पड़ता है। लेकिन अगर व्यवहार के तौर पर देखे हैं तो हर किसी को खुश रखा भी जा सकता है। लोगों में अगर भावनाएं जगें विश्वास जगें तो यह कहना संभव जान पड़ता है कि , एक व्यक्ति दूसरे के काम आ सकता है। खैर अब आगे दूसरी बात करते हैं,,।
                    अभी हाल फिलहाल की घटनाओं को अगर देखें खास करके खबरों को तो कई चीज अपने आप में ही गुत्थमगुत्था की तरह उलझे हुए नजर आते हैं। परोक्ष यानी जो बीत चुका है उसी के आधार पर यह नई घटनाएं सामने आ रही है। उसमें आर्थिक अपराध की हो या किसी पर आरोप लगाने की हो लेकिन यह सही है कि बीते हुए कल पर ही आज आधारित है। हम दिन-ब-दिन अलग होते जाते हैं बढ़ते जाते हैं बलवती होते जाते हैं लेकिन अगर हम अपनी रूढ़ियों को अपने जड़ को भूल जाएं तो शायद ही हम बलवान हो और आगे बढ़े। इसलिए जरूरी है कि सबसे पहले हम अपने मूल को कभी भी भूले नहीं। उसके साथ-साथ बढ़ते रहें, इससे अपने आप में एक गर्व महसूस होता है और ऐसा लगता है कि हम सब एक साथ ही जुड़े हुए हैं।
        आपको लगता होगा कि मैंने शुरुआत कहां से की और पहुंच कहां जा रहा हूं बीच में कहीं कोई तारतम्य दिख ही नहीं रहा है। यह सच है मैं लिखने की कोशिश कुछ और कर रहा हूं लिखता कुछ और जा रहा हूं क्योंकि मेरे दिमाग में कई ऐसी चीजें चल रही है जिसे मैं आपको बताऊं क्योंकि मैं आपसे बहुत दिनों से दूर रहा हूं। सब चीज धीरे-धीरे एक सीधी लकीर में आते जा रही है जल्द ही सारी चीजें सुलझ जाएंगी और फिर से आपको मैं सटीक और व्यवहारिक तौर पर वही चीज बताऊंगा जिसे आप सुनना चाहें या मैं आपको सीधे सीधे तौर पर बताना चाहूंगा। तो चलिए शुरुआत के लिए इसे ही मान लें और एक बार फिर से आपसे मुखातिब होते हुए श्री गणेश है यह.....!
.....
खामोशी बयां कर देती है सब कुछ, 
जब दिल का रिश्ता जुड़ जाता है किसी से...!



Wednesday, March 7, 2018

खामोशी...




रास्ते ख़ामोश हैं और मंज़िलें चुपचाप हैं,
मेरी ज़िन्दगी का मकसद, सच कहूं तो आप हैं,
आपके आने से पहले चल रही थी ज़िन्दगी .!
वो भला क्या ज़िन्दगी, जिसमें न शामिल आप हैं
ज़िन्दगी भर ख्वाब में चेहरा जो हम देखा करते ,,
वो न कोई और था, सपना भी मेरा आप हैं!!

Tuesday, March 6, 2018

हर दिन आप तक



झुग्गियों के खण्डहर
खुल के हँसे
आसमान पर
और फिर
खामोश !

Sunday, January 1, 2017

संकल्प

आम तौर पर साल के शुरूआत में हर कोई कुछ नया करने या नई सोंच को आगे बढाने के लिए प्रतिबद्ध होता है। मैं भी एक तरह से संकल्पित हूँ आप सबों से कि नए साल में जरूर कुछ ऐसा करूँगा जिससे आप सबों से दूर नहीं रहूँ। लिहाजा हर दिन आप सबों से मुखातिब रहूँगा जिससे आपके बीच में ही रह सकूँ ।।।

Thursday, June 16, 2016

जिम्मेदारी ऐसी थी कि .. सब भूल सा गया था..

अगर मैं के बजाय हम कहूँ तो कुछ नजदीकी ज्यादा जान पडेगा। दरअसल मैं अब केवल मैं नहीं रहा हम में बदल गया हूँ। मेंरे बिछडे मुझे मिल गए हैं। इन बिछडे लोगों की संख्या अब दिन ब दिन बढते ही जा रही है। इन बढते लोगों के चेहरे पर खुशी देख कर मुझे भी खुशी मिलती है।यही वजह है कि जब मैने जिम्मेदारी संभाली तो भूल गया कि आखिर कितनी रातों से नींद नहीं ले पाया था। लेकिन शुक्र है कि सब बेहद करीने से निपट गया। जैसे एक महायज्ञथा और उस यज्ञमें शरीक सभी अपने अपने विधाओं से लैस थे। उन विधाओं में कहीं कुछ मुख्य अध्याय छूट ना जाए इस लिए चहुओर नजर बनाए रखना जरूरी थी। इस लिए कुछ बातों को नजंरअंदाज कर दिया कि आखिर इस दौरन दिखता कैसे हूँ। मैं तो अपने आप को ही भूल गया था। सालों बाद ऐसा मौका आया था, एक शक्ति मिली थी। हालाकि कई मित्रों की कमी जरूर खली। लेकिन सब एक ही ओर सिमटता है...
असीम आकाश का निस्तार खुलापन,
अनजानी राहों में भटकते पंछी,
अपरिचित दिशाएँ खोजती हवाएँ,
बादलों के बनते बिगडते झुरमुट,
और इन सबको देखती आँखे
जो महसूस करती हैं-बिल्कुल निजी क्षण वह
पर कौन,कहाँ, किसे कितना कह पाता है!..

Wednesday, August 19, 2015

समझ में आ गया रहस्य ...

आपका साथ मुझे नया उत्साह देता है।लेकिन ये तभी संभव हो पाता है जब में आपके संपर्क में आता हूँ, लेकिन कई बार इस संपर्क से मैं अलग हो जाता हूँ , जिससे उत्साह तो छोडिए मैं जीवन की राह ही छोजने लगता हूँ। लेकिन तकरीबन दो साल बाद आपके सामने आया हूँ। इस बीच काफी बदलाव हुए । जिसे मैने लडते हुए सहा। क्योकि पिछले अनुभव इतने कडवे थे जिसे सहज स्वीकार करना मेरे लिए संभव नहींथा। लेकिन पता नहीं कहाँ से शक्ति आ जाती है कि फिर से अपनी कमान संभाल लेता हूँ । ये सब संभव हो पाता है आप सबों के सहयोग से ही। जब मैं अपना बंलॉग लिखना शुरु किया था, उस समय अगर कहा जाए तो में एक अनाडी था, हालाकि अब भी कोई अगड्धत्त नहीं हूँ। अभी भी कई तीजेंमम ऐसी है, जिसे सीखने की कोशिश कर रहा हूँ।लगता है समय के साथ सीख भी जाउँगा, खैर में आप को कुछ बातें संक्षेप में बताने की कोशिश करता हूँ। विगत दिनों भारत के कई हिस्सों में सफर किया, बहुत कुछ सीखा। हाँ मित्रता का रहस्य जिसे मैने पिछले दिनों अधूरा छोडा था, उस रहस्य को समझ गया कि ये कितना अविस्मिरणीय बंधन है। इस बंधन में अगर सही तरीके सं बंध गए तो बँध गए वरना सब कुछ बेकार। मेरे पिता जी कहते थे, कि जीवन में बहुत लोग अलग अलग समय पर मिलते हैं लेकिन वो तुम्हारे मित्र नहीं हो सकते, परिचित और कुछ समय के लिए साथी जरूर हो सकते हैं। हमने अपने कॉलेज के दिनों में बहुत कम लोगों से दोस्ती की , समय की धारा में कई लोग अलग अलग राह पर निकल गए थे। लेकिन वक्त ने एक बार फिर पलटा खाया और सब मिल गए। अब सभी एक साथ मिल गए हैं तो इन्हें सहेजने के लिए हर प्रयास कर रहा हूँ। ये भी कोशिश कर रहा हूँ कि नए दोस्तों और पुराने दोस्तोंमें सामंजस्य बैठाया जाए, जिससे जीने का मजा और आए। मित्रता का रहस्य है विश्वास अगर अक दूसरे पर पूर्ण विश्वास है तो आप एक दूसरे के परम मित्र हैं। लेकिन जिसने मुझसे मित्रता का चाह रखी पिछले दिनों उसे मुझ पर विश्वास नहीं था। इसलिए बात अधूरी ही रह गई। कॉलेज के दिनोंमें बने मित्रों को आज भी मेरे उपर विश्वास है इस लिए पुरानी मित्रता अभी तक चली आ रही है और मेर ख्याल के वक्त का पलटा खाना शायद मुझे संकेत ही दे रहा है कि जिस पर विश्वास कर सबकुछ भूलाने की कोशिश कर रहे हो वह छलावा है। इसलिए पुराने मित्रों से हर राज साझा करने में कोई हर्ज नहीं और मैने हर राज को साझा किया। ...शेष जल्द ही आपके सामने लाउँगा...
    

Saturday, August 16, 2014

मित्रता के रहस्य ..

हमनें मित्रता की शुरूआत या इसे समझना तब शुरू किया जब इसे महसूस किया! कॉलेज में आने के बाद कई तरह के मित्र मिलें. लेकिन मैं अपने दिल की बातें बेहद ही अपने आप में निहीत रखा इसे कभी जाहिर नहीं किया. लेकिन अचानक से मेरे दोस्तों ने जब नई तकनीकि की सहारा लेकर मोबाईल ग्रुप शुरू किया तो हम सब एक दूसरे के करीब आए.मित्रता दिवस के अवसर पर एक दूसरे को बधाई देते हुए दोस्तों ने कई संदेश दिए मैं उनका संंकलन आपके सामने रख रहा हूँ जरा आप भी इसे देखें और अपने विचार से अवगत कराए..
1.
ईश्वर ने हमारे शरीर
की रचना कुछ इस प्रकार की है
कि ना तो हम अपनी पीठ
थपथपा सकते है और ना ही स्वयं
को लात मार सकते हैं
इसलिए हमारे जीवन में मित्र होना जरुरी है..
2.
खवाहिश  नही  मुझे  मशहुर  होने  की।
आप  मुझे  पहचानते  हो  बस  इतना  ही  काफी  है।
अच्छे  ने  अच्छा  और  बुरे  ने  बुरा  जाना  मुझे।
क्यों  की  जीसकी  जीतनी  जरुरत  थी  उसने  उतना  ही  पहचाना  मुझे।
 ज़िन्दगी  का  फ़लसफ़ा  भी   कितना  अजीब  है,
शामें  कटती  नहीं,  और  साल  गुज़रते  चले  जा  रहे  हैं....!!
3
एक  अजीब  सी  दौड़  है  ये  ज़िन्दगी,
जीत  जाओ  तो  कई  अपने  पीछे  छूट  जाते  हैं,
 और  हार  जाओ  तो  अपने  ही  पीछे  छोड़  जाते  हैं।.